चढ़ने के बाद फिर लुढ़का पारा
रांची। न्यूनतम पारा एक बार फिर लुढ़क गया। मकर संक्रांति के दिन यानी 14 जनवरी. को इसमें लगभग 1.0 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। कांके पर स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग ने इसे दर्ज किया है।
विवि के कृषि भौतिकी एवं पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष डॉ ए वदूद के मुताबिक रविवार को न्यूनतम तापमान 5.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान में करीब 1.0 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। यह 23.3 डिग्री सेल्सियस मापा गया। हवा 3.3 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही है। छूप अच्छी लग रही है। लोग कमरे में बैठने के बजाए धूप का आनंद लेना पसंद कर रहे हैं।
बताते चलें कि शनिवार को कांके क्षेत्र का अधिकतम तापमान 22.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस था। हवा 4.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी।
मकर संक्रांति के दिन न्यूनतम पारे में आई गिरावट के कारण वातावरण में ठंड महसूस की जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान के बढ़ने की संभावना है। हालांकि हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में बर्फबारी होने पर राज्य का मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। आमतौर पर वहां पर बर्फबारी होने पर उधर से चलने वाली हवा का प्रभाव झारखंड के विभिन्न जिलों में देखने को मिलता है।
विवि के कृषि भौतिकी एवं पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष डॉ ए वदूद के मुताबिक रविवार को न्यूनतम तापमान 5.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान में करीब 1.0 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। यह 23.3 डिग्री सेल्सियस मापा गया। हवा 3.3 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही है। छूप अच्छी लग रही है। लोग कमरे में बैठने के बजाए धूप का आनंद लेना पसंद कर रहे हैं।
बताते चलें कि शनिवार को कांके क्षेत्र का अधिकतम तापमान 22.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस था। हवा 4.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी।
मकर संक्रांति के दिन न्यूनतम पारे में आई गिरावट के कारण वातावरण में ठंड महसूस की जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान के बढ़ने की संभावना है। हालांकि हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में बर्फबारी होने पर राज्य का मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। आमतौर पर वहां पर बर्फबारी होने पर उधर से चलने वाली हवा का प्रभाव झारखंड के विभिन्न जिलों में देखने को मिलता है।
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