13 लोगों का शव तीन एंबुलेंस में पहुंचा गांव, बिलख पड़ा पूरा गांव
गुमला। बीती रात सड़क हादसे में मृत 13 लोगों का शव तीन
एंबुलेंस में भरकर सोमवार को जतरगढ़ी गांव पहुंचा। एंबुलेंस के गांव में
दाखिल होते ही लोग बिलख पड़े। एंबुलेंस के रुकते ही लोग उसे घेर खड़े हो गए।
हर ओर से रोने की आवाज ने मातमी सन्नाटे को तोड़ दिया। एंबुलेंस से एक-एक कर
13 शव निकाले गए। देर शाम उनका अंतिम संस्कार किया गया।
बताते चलें कि रविवार की देर रात रांची-गुमला एनएच-33 पर पारस नदी पुल के पास अवैध बालू लेकर जा रहे तेज रफ्तार ट्रक ने ऑटो को टक्कर मार दी थी। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। ऑटो में ड्राइवर सहित 16 लोग थे। ये सभी मकर संक्रांति पर रांची के बेड़ो ब्लॉक में लगने वाले घघारी मेला देखने गए थे। देर शाम सभी लौट रहे थे। रात करीब नौ बजे पारस नदी के पास अवैध बालू लदे ट्रक ने सामने से आ रहे ऑटो को टक्कर मार दी। ऑटो के परखच्चे उड़ गए।
13 लोगों की मौत के बाद गांव के करीब 126 घरों में आज चूल्हा नहीं जला। शवों का पोस्टमाॅर्टम कर एंबुलेंस के माध्यम से गांव लाया गया। इससे पहले गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था। जैसे ही शव आने की बात फैली, रोने-बिलखने की आवाज ने पूरे गांव को गम में डूबो दिया। बच्चे-बच्चे की आंखों से आंसू छलक पड़ा। लोग एंबुलेंस के पास एकत्रित होकर अपने परिवार के सदस्यों के साथ शवों को नीचे उतारने में जुटे रहे। जैसे-जैसे शव नीचे उतारे गए, वैसे-वैसे ही ग्रामीणों की चीत्कार की आवाज और बढ़ती गई।
बताते चलें कि रविवार की देर रात रांची-गुमला एनएच-33 पर पारस नदी पुल के पास अवैध बालू लेकर जा रहे तेज रफ्तार ट्रक ने ऑटो को टक्कर मार दी थी। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। ऑटो में ड्राइवर सहित 16 लोग थे। ये सभी मकर संक्रांति पर रांची के बेड़ो ब्लॉक में लगने वाले घघारी मेला देखने गए थे। देर शाम सभी लौट रहे थे। रात करीब नौ बजे पारस नदी के पास अवैध बालू लदे ट्रक ने सामने से आ रहे ऑटो को टक्कर मार दी। ऑटो के परखच्चे उड़ गए।
13 लोगों की मौत के बाद गांव के करीब 126 घरों में आज चूल्हा नहीं जला। शवों का पोस्टमाॅर्टम कर एंबुलेंस के माध्यम से गांव लाया गया। इससे पहले गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था। जैसे ही शव आने की बात फैली, रोने-बिलखने की आवाज ने पूरे गांव को गम में डूबो दिया। बच्चे-बच्चे की आंखों से आंसू छलक पड़ा। लोग एंबुलेंस के पास एकत्रित होकर अपने परिवार के सदस्यों के साथ शवों को नीचे उतारने में जुटे रहे। जैसे-जैसे शव नीचे उतारे गए, वैसे-वैसे ही ग्रामीणों की चीत्कार की आवाज और बढ़ती गई।


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