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माघ मेले में दूसरे दिन निकाल भव्य शोभायात्रा, मौनी अमावस्या पर बदलेगी कई राशियों की किस्मत

रांची। उत्तरकाशी में चल रहे माघ मेले के दूसरे दिन बाड़ाहाट के आराध्य देव कंडार देवता की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें कंडार देवता की भोगमूर्ति को हाथी के प्रतिरूप पर बिठाकर पंच पंडौ एवं स्थानीय ग्रामीणों के साथ पूरे बाड़ाहाट क्षेत्र में यात्रा कराई गई। जो माघ मेले में आकर्षण का केन्द्र रहा।

पंच पांडौ आयोजन समिति की ओर से माघ मेले के दूसरे दिन बाड़ाहाट क्षेत्र के अधिपति कंडार देवता की भोग मूर्ति को देवता की थात चमाला की चौंरी में हाथी के प्रतिरूप पर बिठाया गया। जहां पर कंडार देवता की विधि विधान से पूजा अर्चना कर सैकड़ों ग्रामीणों की मौजदूगी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई।

इसमें ग्रामीण ढोल दमाऊं की थाप पर नृत्य करते हुए शोभा यात्रा के साथ विश्वनाथ चौक, हनुमान चौक से मैन बाजार होते हुए मणिकर्णिका घाट पहुंचे। जहां पर देवता का स्नान करा कर विधिवत पूजा अर्चना की गई। वहीं इस मौके पर साथ में आये पांडवों ने भी यज्ञ अनुष्ठान कर कंडार देवता की पूजा अर्चना की।

मेले में मंगलवार को मौनी अमवस्या होगी। शिवमहापुराण में माघ मास की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या का महत्व बताते हुए स्वयं भगवान शिव कहते हैं कि जो मनुष्य इस दिन गंगा, जमुना आदि सप्त नदियों में स्नान करके सच्चे मन से दान करता है उस पर समस्त नक्षत्रों की कृपा रहती है।

मौनी शब्द मौन से उत्पन्न हुआ है। यानी इस दिन मौन रहकर व्रत करना चाहिए। इस दिन अपने मन को काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि से दूर रखना चाहिए। चंद्रमा मन का प्रतिनिधित्व करता है और अमावस्या के दिन आकाश में चंद्र दिखाई नहीं पड़ता। इसलिए मन की स्थिति इस दिन अत्यंत कमजोर रहती है। इसलिए मौन रहकर चंद्र को बल प्रदान किया जाता है।

शिवपुराण कथन के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन ग्रहों की पीड़ा शांत करने के उपाय भी किए जाते है। यदि आप किसी न किसी ग्रह की पीड़ा से जूझ रहें हैं तो इस दिन शिव का अभिषेक करें। नवग्रह यंत्र की पूजा करें। नवग्रहों के मंत्रों का जाप करके उनके निमित्त दान करें। इस दिन पीपल में कच्चा दूध और जल चढ़ाने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

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