अल्पसंख्यकों के संवैधानिक-बुनियादी ज्वलंत मुद्दे हाशियें पर: मुस्लिम बुद्दिजीवी
रांची। मुस्लिम बुद्दुजीवी एव सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अनवर टावर, विश्वकर्मा मंदिर लेन, मेन रोड़-रांची में एक प्रेस वार्ता हुई। इसमें कहा गया कि जब से मौजूदा सरकार आई है, तब से राज्य के अल्पसंख्यकों को दोयम नागरिक बना कर रख दिया गया है। मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर लगातार जान माल के हमलें हो रहे है, जिसमें खानपान, धर्म, गाने, चेहरे एव पुलिस हज़ात समेत दर्ज़नों मौतें-आगजनी-लाखों लाख की आर्थिक क्षति हुई। उसपर न कोई सरकारी जांच, न ही दोषियों पर कार्रवाई और न ही मुआवजा मिला। केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग की बालूमाथ एव हज़ारीबाग फ़साद/मौत पर रिपोर्ट/सुझाव 1 सालों से पेंडिंग पड़ी है। केंद प्रायोजित 25 अल्पसंख्यक स्किम प्रचार-प्रसार का जानबूझकर न होना एव अल्पसंख्यक आबादी अनुसार कोटा, बजट, लक्ष्य प्राप्ति में असंवेदनशील होना शामिल है।
कहा कि झारखंड राज्य अल्पसंख्यकों के संवैधानिक ढांचे को पंगु कर बेजान करना, उर्दू शिक्षकों की पोस्ट को खत्म कर दोहरा मापदंड अपनाना शामिल है। रांची नगर निकायों में परिसीमन की संवैधानिक हत्या कर अल्पसंख्यकों की भागीदारी को नग्न करना शामिल है। झारखंड आंदोलकारी के सपने का झारखंड अभी तक पूरा नही होना।
झारखंड आंदोलकारी प्रोफेसर ख़ालिक़ अहमद ने कहा कि आज भी हम आपने सपनों का झारखंड नही बना है। झारखंड आंदोलकारी एव मुस्लिम झारखंड आंदोलकारी हाशियें पर है। उम्मीद करते है कि झारखंड विधानसभा के सदस्य झारखंड के जनमानस की झारखंडी परिकल्पना को बहाल कराएं।
मौलाना सैयद तहजीबुल हसन रिज़वी (सदस्य, झारखंड राज्य वक्फ़बोर्ड) ने कहा कि झारखंड राज्य वक्फ़ बोर्ड को सरकार ने पंगु कर बेजान कर दिया है। न ही उसके पूरे सदस्य और न ही आर्थिक/संवैधानिक अधिकार, बल्कि सरकार इसे सारे संवैधानिक अधिकार/आर्थिक/सक्षम मैनपॉवर- बुनियादी ढांचा उपलब्ध के साथ जल्द पुनर्गठित करें, ताकि मुस्लिम समाज भी इसका सही फायदा उठा सके।
हाज़ी मोख्तार अहमद(महासचिव, अंजुमन इस्लामिया रांची) ने कहा कि झारखंड सरकार अल्पसंख्यकों के संवैधानिक मुद्दों हल करें। झारखंड राज्य हज कमेटी का भी कार्यकाल खत्म होने से पहले ही नई हज कमेटी का प्रस्ताव आ जाना चाहिए था मगर अभी कार्यकाल खत्म होने पर सरकार को संवेदनशील होकर हज यात्रियों को परेशानी से भी बचाया जा सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर अहमद ने कहा कि झारखंड सरकार एव झारखंड विधानसभा के माननीय सदस्यों से बजट सत्र में अल्पसंख्यकों के बजट/स्कीमों को कारगार हम उम्मीद करते है। सामाजिक कार्यकर्ता नदीम खान ने कहा कि हमलोग पिछले 4 विधानसभा सत्र से अल्पसंख्यकों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कर हल की उम्मीद देख रहे थे। मगर अफसोस कि सत्र को जानबूझकर चलने नही दिया गया। जल्द ही माननीय मुख्यमंत्री झारखंड से अल्पसंख्यकों का एक प्रतिनिधिमंडल मिलेगा।
प्रेसवार्ता में झारखंड आंदोलनकारी प्रोफेसर ख़ालिक़ अहमद, शिक्षाविद् मौलाना शरीफ़ एहसन मज़हरी, मौलाना सयैद तहजीबुल हसन रिज़वी (सदस्य,झारखंड राज्य वक्फ़ बोर्ड), हाज़ी मोख्तार अहमद (महासचिव, अंजुमन इस्लामिया रांची),वरिष्ठ पत्रकार मोज़फ्फर हसन, झारखंड आंदोलकारी बशीर अहमद(पूर्व सदस्य, प्रधानमंत्री 15 सूत्री कार्यक्रम-झारखंड), लेखक सोहैल सईद, हाज़ी मो एकबाल(अध्यक्ष, अंजुमन इस्लामिया पुंदाग), सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर अहमद, हाज़ी ज़ाकिर अंसारी, नदीम खान, फ़राज़ अब्बास, मोईन अहमद, मो परवेज़ आलम, मो कलाम उपस्थित थे।
कहा कि झारखंड राज्य अल्पसंख्यकों के संवैधानिक ढांचे को पंगु कर बेजान करना, उर्दू शिक्षकों की पोस्ट को खत्म कर दोहरा मापदंड अपनाना शामिल है। रांची नगर निकायों में परिसीमन की संवैधानिक हत्या कर अल्पसंख्यकों की भागीदारी को नग्न करना शामिल है। झारखंड आंदोलकारी के सपने का झारखंड अभी तक पूरा नही होना।
झारखंड आंदोलकारी प्रोफेसर ख़ालिक़ अहमद ने कहा कि आज भी हम आपने सपनों का झारखंड नही बना है। झारखंड आंदोलकारी एव मुस्लिम झारखंड आंदोलकारी हाशियें पर है। उम्मीद करते है कि झारखंड विधानसभा के सदस्य झारखंड के जनमानस की झारखंडी परिकल्पना को बहाल कराएं।
मौलाना सैयद तहजीबुल हसन रिज़वी (सदस्य, झारखंड राज्य वक्फ़बोर्ड) ने कहा कि झारखंड राज्य वक्फ़ बोर्ड को सरकार ने पंगु कर बेजान कर दिया है। न ही उसके पूरे सदस्य और न ही आर्थिक/संवैधानिक अधिकार, बल्कि सरकार इसे सारे संवैधानिक अधिकार/आर्थिक/सक्षम मैनपॉवर- बुनियादी ढांचा उपलब्ध के साथ जल्द पुनर्गठित करें, ताकि मुस्लिम समाज भी इसका सही फायदा उठा सके।
हाज़ी मोख्तार अहमद(महासचिव, अंजुमन इस्लामिया रांची) ने कहा कि झारखंड सरकार अल्पसंख्यकों के संवैधानिक मुद्दों हल करें। झारखंड राज्य हज कमेटी का भी कार्यकाल खत्म होने से पहले ही नई हज कमेटी का प्रस्ताव आ जाना चाहिए था मगर अभी कार्यकाल खत्म होने पर सरकार को संवेदनशील होकर हज यात्रियों को परेशानी से भी बचाया जा सकता है।
सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर अहमद ने कहा कि झारखंड सरकार एव झारखंड विधानसभा के माननीय सदस्यों से बजट सत्र में अल्पसंख्यकों के बजट/स्कीमों को कारगार हम उम्मीद करते है। सामाजिक कार्यकर्ता नदीम खान ने कहा कि हमलोग पिछले 4 विधानसभा सत्र से अल्पसंख्यकों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कर हल की उम्मीद देख रहे थे। मगर अफसोस कि सत्र को जानबूझकर चलने नही दिया गया। जल्द ही माननीय मुख्यमंत्री झारखंड से अल्पसंख्यकों का एक प्रतिनिधिमंडल मिलेगा।
प्रेसवार्ता में झारखंड आंदोलनकारी प्रोफेसर ख़ालिक़ अहमद, शिक्षाविद् मौलाना शरीफ़ एहसन मज़हरी, मौलाना सयैद तहजीबुल हसन रिज़वी (सदस्य,झारखंड राज्य वक्फ़ बोर्ड), हाज़ी मोख्तार अहमद (महासचिव, अंजुमन इस्लामिया रांची),वरिष्ठ पत्रकार मोज़फ्फर हसन, झारखंड आंदोलकारी बशीर अहमद(पूर्व सदस्य, प्रधानमंत्री 15 सूत्री कार्यक्रम-झारखंड), लेखक सोहैल सईद, हाज़ी मो एकबाल(अध्यक्ष, अंजुमन इस्लामिया पुंदाग), सामाजिक कार्यकर्ता तनवीर अहमद, हाज़ी ज़ाकिर अंसारी, नदीम खान, फ़राज़ अब्बास, मोईन अहमद, मो परवेज़ आलम, मो कलाम उपस्थित थे।

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