पूर्वी भारत को गेहूं का उन्नत बीज उपलब्ध करायेगा बीएयू
रांची। पूर्वी क्षेत्र के राज्यों के लिए गेहूं और जौ के उन्नत प्रभेदों की जरूरत की पूर्ति बिरसा कृषि विश्वविद्यालय करेगा। विवि हजारीबाग के गौरिया करमा प्रक्षेत्र के 100 एकड़ भूमि में प्रजनक बीज और आधार बीज पैदा करेगा। इसके लिए अच्छी किस्मों का न्यूक्लियस बीज हरियाणा के करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान उपलब्ध कराएगा।
आबोहवा है उपयुक्त
कुलपति डॉ परविन्दर कौशल ने यह जानकारी गेहूं एवं जौ संबंधी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के रांची केन्द्र के कामकाज की समीक्षा के दौरान दी । उन्होंने कहा कि झारखंड की मिट्टी और आबोहवा सालो भर बीज उत्पादन के लिए उपयुक्त है। पूर्वी भारत के अन्य राज्यों की तरह यहां बाढ़ एवं जल जमाव की भी समस्या नहीं है। ऐसे में यहां बीज उत्पादन और भंडारण का काम सालो भर चल सकता है। बीज उत्पादन का इंडेंट (कार्यादेश) भारत सरकार के कृषि एवं सहकारिता विभाग से प्राप्त होगा।
उत्पादन रबी मौसम से ही
डॉ कौशल ने बताया कि देर से परिपक्व होने वाले गेहूं के पिछात प्रभेदों का उत्पादन वर्तमान रबी मौसम से ही शुरू हो जाएगा। शीघ्र तैयार होनेवाली अगात किस्मों का बीज उत्पादन अगले रबी मौसम से शुरू किया जाएगा। यदि करनाल स्थित शोध संस्थान से जौ के पिछात प्रभेदों का न्यूक्लियस बीज भी शीघ्र उपलब्ध हो गया तो उसके प्रजनक बीज का उत्पादन भी चालू रबी मौसम में ही शुरू कर दिया जाएगा। जौ इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण फसल है। इसमें पानी की भी जरूरत कम होती है। गेहूं एवं जौ फसल से संबंधित वैज्ञानिकों को उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए करनाल भेजा जाएगा।
समीक्षा के लिए आये विशेषज्ञ
बीएयू में चल रहे शोध कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए करनाल स्थित संस्थान के निदेशक डॉ जीपी सिंह और कार्यक्रम समन्वयक डॉ रवीश चतरथ दो से चार जनवरी तक रांची में थे। उन्होंने बीएयू के प्रक्षेत्र में लगी प्रायोगिक फसलों का निरीक्षण किया। संबंधित वैज्ञानिकों की रिपोर्ट प्रस्तुतीकरण को देखा। डॉ सिंह ने कहा कि बीएयू को कीट-रोग रोधी, सूखा सहिष्णुता, शीघ्र परिपक्वता जैसी विशेषताओं के लिए चिन्हित 600-700 एक्टिव कलेक्शन उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि यहां उनका परीक्षण कर कम पानी में जल्दी पकनेवाली किस्मों का विकास किया जा सके। अभी बीएयू के पास ऐसे केवल 36 कलेक्शन हैं I इसके अतिरिक्त संस्थान द्वारा बीएयू को लगभग 100 ऐसे जीनोटाइप भी दिए जायेंगे, जो राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षण के लिए तैयार हैं।
वार्षिक समूह बैठक बीएयू में
डॉ सिंह ने बताया कि गेहूं और जौ संबंधी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों की वार्षिक समूह बैठक बीएयू में अगस्त '18 में होगी। इसमें देश-विदेश के लगभग 400 वैज्ञानिक भाग लेंगे। समीक्षा बैठक में बीएयू के शोध निदेशक डॉ डी एन सिंह, डॉ सुशील प्रसाद, परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक डॉ सूर्य प्रकाश और डॉ नैयर अली भी मौजूद थे।
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